प्रेमानंद जी महाराज का जन्म एक धार्मिक परिवार में हुआ था और बचपन से ही उन्हें आध्यात्मिकता की ओर आकर्षण था।
उन्होंने बहुत ही कम उम्र में सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यास धारण किया और एक साधारण जीवन व्यतीत करने लगे।
प्रेमानंद जी महाराज भक्ति मार्ग के महान प्रचारक थे और उन्होंने भक्ति कीर्तन के माध्यम से लोगों को भगवान की ओर प्रेरित किया।
प्रेमानंद जी महाराज ने अपने गुरु से दीक्षा प्राप्त की और उनके आदर्शों का पालन करते हुए अपनी शिक्षाओं का प्रचार किया।
उन्होंने कई स्थानों पर आश्रमों की स्थापना की, जहां भक्ति, ध्यान, और सेवा के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी जाती थी।
प्रेमानंद जी महाराज ने मानव सेवा को जीवन का मूल उद्देश्य बताया और जीवन भर गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा की।
उन्होंने ध्यान और साधना पर विशेष बल दिया और कहा कि मन की शांति और भगवान की प्राप्ति के लिए ध्यान अति आवश्यक है।
महाराज जी ने सिखाया कि धर्म और अध्यात्म का असली उद्देश्य मानवता की सेवा और जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाना है।
वे नियमित रूप से प्रवचन करते थे, जिनमें जीवन के उद्देश्य, आध्यात्मिकता, और ईश्वर प्राप्ति की बातें होती थीं। उनके प्रवचन बहुत ही सरल और प्रभावशाली होते थे।
प्रेमानंद जी महाराज का समाज में बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने लोगों को नैतिकता, सत्यता और प्रेम के मार्ग पर चलने की शिक्षा दी।