तिरुपति बालाजी मंदिर को दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश में स्थित तिरुमाला पहाड़ियों पर बनाया गया है। इसे श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर या तिरुमाला मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
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माना जाता है कि भगवान वेंकटेश्वर विष्णु के अवतार हैं, जिन्होंने कलियुग में धरती पर मानवता की भलाई के लिए अवतार लिया था।
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तिरुपति मंदिर का लड्डू प्रसादम विश्व प्रसिद्ध है। इसे भगवान के आशीर्वाद स्वरूप माना जाता है और इसकी शुद्धता और स्वाद अद्वितीय है।
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भक्त यहाँ अपने बाल दान करते हैं। मान्यता है कि बाल दान करने से भक्त के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और उन्हें भगवान का आशीर्वाद मिलता है।
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तिरुपति मंदिर दुनिया का सबसे धनी मंदिर है। भक्त यहाँ सोना, चांदी, और धन दान करते हैं। इन दान से मंदिर में न केवल धार्मिक गतिविधियाँ चलती हैं, बल्कि सामाजिक सेवा कार्य भी होते हैं।
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तिरुपति मंदिर में 24 घंटे पूजा और अर्चना की जाती है। भगवान वेंकटेश्वर की पूजा विशिष्ट विधियों के अनुसार की जाती है, और यहाँ का धार्मिक माहौल भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
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मंदिर में एक विशेष घड़ी है जो कभी बंद नहीं होती। यह घड़ी अनंत काल से चल रही है, और इसे भगवान की शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
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तिरुपति बालाजी मंदिर का शिखर एक दिव्य प्रकाश से जगमगाता है, जिसे 'अनंतनामी' कहते हैं। इसे देखने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
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यहाँ विवाह कराना बहुत शुभ माना जाता है। जोड़े यहाँ भगवान वेंकटेश्वर और देवी पद्मावती के आशीर्वाद से अपना वैवाहिक जीवन आरंभ करते हैं।
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भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति के बारे में कहा जाता है कि यह स्वयंभू है, यानी यह मूर्ति धरती पर अपने आप प्रकट हुई थी। इस प्रतिमा का विशेष चमत्कारी महत्व है और इसके दर्शन मात्र से सभी दुख दूर हो जाते हैं।